वह सर्दियों की एक रात थी, दो बजे का समय हो रहा था, पुलिस ने एक हवेली को घेरे में ले रखा था, वह हवेली आधी जली हुई थी, और आसेब ज़दा समझी जाती थी, (जहां जिन भूत या चुड़ैल रहती हों ) क्योंकि एक साल पहले उस हवेली में चौधरी बरकतुल्लाह के दुश्मनों ने आग लगाकर पूरे खानदान के बाईस सदस्यों को ज़िंदा जला दिया था।
KHATARNAAK KHEL
इस हवेली में कुछ रहस्यमय गतिविधियाँ दिखाई दी थीं, जिसकी इत्तिला पुलिस को दी गई तो बड़ी तादाद के साथ पुलिस ने इस हवेली को घेरे में ले लिया। पुलिस वालों की तादाद चालीस से कम किसी तरह भी नहीं थी। पुलिस की इस पार्टी की कयादत एक डीएसपी कर रहा था, जब के दो इंस्पेक्टर भी थे। पुलिस वाले दरख्तों की आड़ लिए राइफलें संभाले खड़े थे।
डीएसपी ने मुख्तलिफ सिम्तों (दिशा) में खड़े दोनों इंस्पेक्टरों को मखसूस (खास तरह का ) सिगनल दिया तो चारों तरफ से पुलिस के नौजवान आगे बढ़ने लगे और हवेली से कुछ कदम के फासले पर रुक गए। डीएसपी ने एक मेगाफोन का बटन दबाया और होंठों से लगाते हुए बोला: 'यह हवेली चारों तरफ से पुलिस के घेरे में है, अंदर जो भी लोग मौजूद हैं वे हाथ उठाकर बाहर आ जाएं, यह पहली और आखिरी वार्निंग है। मैं पांच तक गिनूंगा, अगर तुम लोग बाहर नहीं आए तो हवेली पर धावा बोला जाएगा।'
इस के साथ ही गिनती शुरू हो गई, पांच कहने के बाद भी खामोशी रही। डीएसपी ने कुछ सेकंड इंतजार किया फिर अपने मातहतों को सिगनल दे दिया। पुलिस वाले अपनी अपनी जगहों से निकलकर हवेली की तरफ दौड़ पड़े, लेकिन वहां कुछ नहीं था। पुलिस वालों ने ताकतवर टॉर्चों से हवेली का कोना कोना छान मारा लेकिन वहां किसी इंसान का वजूद नहीं था।"
डीएसपी ने अपने पास खड़े इंस्पेक्टर की ओर देखते हुए कहा: "हैरत है, सब कहाँ गायब हो गए हैं, हालांकि इत्तिला देने वाले ने हलफिया तौर पर कहा था कि स्मगलर इस हवेली में मौजूद हैं, लेकिन यहाँ तो किसी का नाम निशान भी नहीं है।"
इंस्पेक्टर ने जवाब दिया: "हो सकता है यह इत्तिला हमें किसी ने गुमराह करने के लिए दी हो? मतलब हमें इधर उलझा कर स्मगलरों की पार्टी किसी और तरफ से निकल गई हो, यह भी हो सकता है वे लोग हमारे आने से पहले ही निकल गए हों।"
डीएसपी ने तमाम नौजवानों को वापसी का हुक्म दे दिया, तमाम सिपाही दो ट्रकों में और इंस्पेक्टर अपनी अपनी जीपों में शहर की तरफ रवाना हो गए। थोड़ी देर बाद उस आधी जली हवेली के अंदर जिंदगी के आसार नज़र आने लगे।
हवेली का एक कमरा जिसकी आधी छत गिर चुकी थी, किसी की मौजूदगी का पता दे रहा था, इस कमरे के एक कोने में फर्श का एक हिस्सा चाक होने लगा, इसमें एक तारीक खाला पैदा हो गया,(अंधेरी जगह) । इस खला से पहले एक इंसानी सर बाहर आया, फिर एक आदमी बाहर निकल आया। फिर तेज़ तेज़ कदम उठाता हुआ हवेली के आस पास दूर दूर तक देखने लगा, यह इत्मिनान कर लेने के बाद कि क़रीब में कोई मौजूद नहीं है, वह वापस उसी कमरे में आया और सीढ़ियाँ उतरता हुआ एक तहखाने में चला गया।
"इस तहखाने का इल्म किसी को नहीं था, इसका राज़ यह तो इस हवेली का मालिक बरकतुल्लाह जानता था, जो इस हवेली में एक साल पहले जल कर खाक हो गया था, या फिर इसका दोस्त माज़ा गुज्जर जानता था जो अक्सर हवेली आया करता था।
इस तहखाने में पांच आदमी मौजूद थे, इनमें से एक पेंट शर्ट पहने एक नौजवान आदमी था जिसकी उम्र लगभाग आठाईस साल हो गई थी। उसका नाम शार्क था। बाकी चारों आदमी चेहरों से देहाती, अजड़ और छुटे हुए बदमाश लगते थे।
इन चारों में एक का नाम माझा गुज्जर था, वह हैरान हो रहा था कि पुलिस को इत्तिला किसने दी? माझा गुज्जर को यह धंधा करते कई साल गुजर गए थे लेकिन किसी में हिम्मत नहीं थी कि कोई उसकी मुखबरी करता।
इन चारों ने उस शहरी बाबू पर शक का इज़हार किया। लेकिन शार्क ने अपनी सफाई देते हुए कहा: 'अगर मैं मुखबरी करता तो खुद कभी भी यहां नहीं आता।' लेकिन इन सब का ख्याल यही था कि मुखबरी शार्क ने की है।
जब शार्क ने देखा कि वह बुरी तरह फंस रहा है, और यकीनन यह लोग उसे मार कर इस तहखाने में डाल देंगे तो उसने एक फैसला किया और अचानक ही दायें तरफ खड़े एक आदमी पर झपटा।"
दूसरे ही लम्हे उस आदमी के हाथों में पकड़ी कलाशनकोव शार्क के हाथों में थी। शार्क ने माझा गुज्जर को मुखातिब करते हुए कहा: हां मैंने ही पुलिस को मुखबरी की थी, लेकिन मुझे इस तहखाने का इल्म नहीं था, अगर मालूम होता तो इस समय तुम सब पुलिस की हरासत में होते।
माझा गुज्जर गुस्से से चिलाया: ओए मकसूद.. ताज. पकड़ो इसे, इन लोगों ने अपनी अपनी राइफलें सीधी करने की कोशिश की, लेकिन शार्क ने बड़ी फुर्ती का मुज़ाहिरा करते हुए उनके पैरों के क़रीब बरस्ट मार दिया।
तहखाना गोलियों की आवाज़ से गूंज उठा। फिर शार्क उल्टे पांव तहखाने की सीढ़ियां चढ़ने लगा, और फिर ऊपर कमरे में छलांग लगा दी और दरवाज़े की तरफ दौड़ा। माझा गुज्जर और उसके साथी भी तहखाने की सीढ़ियों पर दौड़ते हुए कमरे में पहुंचे, लेकिन शार्क तेज़ी से एक टूटी दीवार की तरफ दौड़ने लगा और फिर छलांग लगा कर उस पर चढ़ गया।
माझा गुज्जर ने शार्क को दीवार फ़लांगते देख लिया और अपने साथियों से कहा: वह रहा उस तरफ गोली मार दो, उसे। इस के साथ ही फिज़ा में एक बार फिर गोलियों की आवाज़ से गूंज उठी, कई गोलियां शार्क की क़रीब से गुज़र गईं।
एक गोली शार्क के हाथ में पकड़ी राइफल पर लगी और राइफल उसके हाथ से छूट गई, राइफल दीवार के अंदर की तरफ गिरी थी और शार्क दूसरी तरफ छलांग लगा चुका था, उसने संभल कर दरख्तों की तरफ दौड़ लगा दी।"
वह टबे से उतर कर खेतों में पगडंडी पर दौड़ने लगा, एक बार फिज़ा फिर फायरिंग की आवाज़ से गूंज उठी, लेकिन अब शार्क काफी दूर निकल आया था। वह दौड़ता हुआ आधी मील दूर कच्ची सड़क पर निकल आया, उसने मुड़कर देखा, तारीकी में कुछ दूर दो साये दौड़ते हुए नजर आ रहे थे।
वह बे तेहाशा दौड़ता रहा, उसका सांस बुरी तरह फूल चुका था, कदम लड़खड़ा रहे थे लेकिन वह रुकना नहीं चाहता था। रुकने का मतलब अज़ीयत-नाक मौत के सिवा कुछ नहीं होता। वह कई मील तक दौड़ता रहा, आखिर एक नहर ने उसका रास्ता रोक लिया। नहर लगभग बीस फुट चौड़ी थी और काफी गहरी थी, शार्क ने एक बार फिर मुड़कर देखा, वह दो साये अभी तक दौड़ते हुए आ रहे थे, शार्क किसी हद तक अपने श्वास पर काबू पा चुका था लेकिन वह बीस फुट चौड़ी नहर को पार नहीं कर सकता था, मौत के फरिश्ते सर पर पहुंच रहे थे।
उसके सामने अब एक ही रास्ता था, वह नहर में उतर गया, नहर का पानी बर्फ की तरह ठंडा था। वह कांप कर रह गया लेकिन उन मौत के फरिश्तों के मुकाबले में यह ठंडा पानी क़ाबिल-ए=बर्दाश्त था। पानी उसके सीने तक आ गया, वह आहिस्ता आहिस्ता दूसरे किनारे की तरफ बढ़ता रहा, दूसरा किनारा उस से सिर्फ़ पांच फुट दूर रह गया, अचानक उसका दिल उछल कर हलक में आ गया, मौत के वे फरिश्ते उसके सर पर पहुंच गए थे। शार्क तेज़ी से आगे बढ़ने लगा, नहर के दूसरे किनारे पर झाड़ियां थीं, वह नहर से बाहर निकलना चाहता था कि उसे ख्याल आया: अगर वह पानी से बाहर निकला तो मौत के फरिश्ते उसे गोलियों से छलनी कर देंगे।
शार्क इधर उधर देखने लगा, दायें तरफ नहर में एक कटाव सा नजर आया, वह तेज़ी से उस में घुस गया, यहां पानी उसकी गर्दन तक था, वह किनारे के साथ लग कर झाड़ियों में छुप गया, कुछ ही देर बाद उसे दूसरे किनारे पर दो साये नजर आए, इन दोनों के पास राइफलें थीं और वे बुरी तरह हांप रहे थे, इनमें से एक बोला: यहां तक तो मैंने उसे देखा था लेकिन वह आगे कहां जा सकता है? दूसरे ने कहा: हो सकता है वह नहर पार कर के दूसरी तरफ चला गया हो? अगर वह ज़्यादा दूर निकल गया तो शहर पहुंच जाएगा फिर उसे पकड़ना मुश्किल हो जाएगा।
वह दोनों भी नहर में उतर गए, उन्होंने अपनी अपनी राइफलें सर से ऊपर कर लीं, कुछ ही देर में वह दूसरे किनारे पर आ गए, पहला आदमी बोला: यहां तो ऐसे कुछ आससर दिखाई नहीं दे रहे जिनसे यह अंदाज़ा हो कि वह इस जगह नहर से बाहर निकला होगा।
यह भी हो सकता है वह कुछ आगे जाकर बाहर निकला हो। शार्क सांस रोके पानी में डूबा उनकी बातें सुन रहा था, वह अच्छी तरह जानता था कि अगर तेज़ सांस ली या फिर ज़रा सी भी हरकत की तो झाड़ियों की सरसराहट से वे दोनों उसकी तरफ मुतवज्जह हो जाएंगे। फिर उसकी ज़िंदगी की कोई ज़मानत नहीं दी जा सकती थी। वह दोनों नहर के किनारे किनारे चलने लगे, उनके जूतों में पानी भरा हुआ था, जिससे आवाज़ पैदा हो रही थी, जब आवाज़ आना बंद हो गई तो शार्क बड़ी एहतियात से झाड़ियों को हटाता हुआ नहर से बाहर निकल आया।
उसने जूतों से पानी निकाला और तेज़ी से कुछ दूर नजर आने वाली रोशनियों की तरफ चल पड़ा, चलने से जिस्म में गर्मी महसूस हो रही थी। लगभग एक घंटे बाद वह एक पक्की सड़क पर पहुंच गया, सड़क सुनसान और तारीक थी, शार्क दायें बायें देखने लगा, वह उन दोनों की मुखालफ़ सिम्त (दिशा) जाना चाहता था ताकि उनसे सामना न हो। वह रवी पुल के क़रीब हरा मंडी पहुंच जाता तो उसे कोई सवारी मिल सकती थी, फिर शहर पहुंच कर उन मौत के फरिश्तों से दूर निकल जाता, लेकिन हरा मंडी कई मील दूर थी और पैदल चलकर जाने की सूरत नहीं थी, उसके जूते और कपड़े कीचड़ में लथपथ थे।
वह कुछ देर एक दरख्त के आड़ में खड़ा रहा फिर सड़क पर आने की बजाय खेतों में दायें तरफ चलने लगा, अभी वह कुछ गज़ ही दूर चला था कि सड़क पर दो आमियों को देखकर चौंक गया, वह दोनों नशेब से निकलकर अचानक ही सामने आ गए थे, तारीकी होने के बावजूद उनके हाथों में कलाशनकोव राइफलें साफ़ नजर आ रही थीं।
शार्क एक दम पौधों में दुबक गया, वे दोनों एक कच्चे रास्ते पर आ कर रुक गए, उनमें से एक बोला: वह कहीं भी नजर नहीं आया हमने इधर भी सारा इलाका छान मारा है और इस तरफ भी उसकी कोई खबर नहीं है, वह कहां गायब हो गया है? अगर वह ज़िंदा बच गया तो माझा गुज्जर हमें मौत के घाट उतार देगा। अभी वे बातें कर रहे थे कि अचानक एक तरफ से एक ट्रैक्टर ट्राली की आवाज़ सुनकर वे चौंक गए। इस ट्राली पर पठे या सब्ज़ी हो सकती थी जो हरा मंडी ले जा रहे थे, उन दोनों ने राइफलें निकाल लीं और ट्रैक्टर को रुकने का इशारा किया, जब ट्रैक्टर रुक गया तो एक ने पूछा: तुम्हारे साथ और कौन है? देहाती ड्राइवर ने जवाब दिया: मेरा छोटा भाई है वह ट्राली पर लदे पठों के ऊपर सो रहा है।
पहले आदमी ने दूसरे को इशारा किया कि तुम ऊपर जाकर देखो। शार्क पौधों में दुबका बैठा था, ट्राली से उसका फासला दस पंद्रह फुट से ज़्यादा नहीं था, उनकी बातें उसे साफ़ सुनाई दे रही थीं, जब वह आदमी ट्राली पर चढ़कर अच्छी तरह तसल्ली कर के आया कि शार्क इस ट्राली पर भी नहीं था। उस आदमी ने कहा: मुझे लगता है वह हरा मंडी की तरफ गया होगा, हमें भी इस ट्राली में हरा मंडी जाना चाहिए, हो सकता है वहां उस से सामना हो जाए। वे दोनों उस ट्रैक्टर ट्राली पर सवार हो गए।
ट्रैक्टर ट्राली खेतों वाले कच्चे रास्ते से निकलकर पक्की सड़क पर पहुंच चुकी थी, जब ट्राली काफी दूर निकल गई तो शार्क पौधों से बाहर निकल आया और सड़क पर आ गया, सड़क एक बार फिर वीरान हो चुकी थी, अचानक दूर से एक और ट्रैक्टर की आवाज़ सुनकर वह दरख्त की आड़ में हो गया, इस ट्रैक्टर ट्राली पर भी पठे लदे हुए थे, शार्क ने इत्मीनान कर लिया कि इस ट्रैक्टर ट्राली पर ड्राइवर के अलावा कोई भी नहीं है, उसने ट्रैक्टर को रुकने का इशारा किया। ड्राइवर से उसे घूरते हुए कहा: क्या बात है भाई कौन हो तुम?
शार्क ने जवाब दिया: मैं गांव से आ रहा था कि डाकू मेरी मोटर साइकल छीन कर ले गए हैं, वे मुझे भी क़त्ल कर देते मगर मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई है। अगर तुम मुझे सब्ज़ी मंडी तक पहुंचा दो तो बड़ी मेहरबानी होगी। ड्राइवर ने शार्क को ट्राली में बैठ जाने का कहा। रात की तारीकी हल्के उजाले में बदलने लगी, दस मिनट के बाद वे मंडी पहुंच गए, मंडी में अच्छी खासी चहल-पहल थी। अब कारोबार शुरू हो चुका था, शार्क ने ट्राली वाले का शुक्रिया अदा किया और ट्राली से छलांग लगा दी और हरा मंडी में दाखिल हो गया।
शार्क भीड़ में रास्ता बनाता हुआ एक तरफ जाने की कोशिश कर रहा था ताकि कोई सवारी मिल जाए तो शहर जा सके, वह एक तरफ मुड़ा ही था कि दो आदमियों ने अचानक उसका रास्ता रोक लिया, उन दोनों ने अपने बदन पर चादरें ओढ़ रखी थीं, उनकी शक्लें देखकर शार्क कांप उठा, वह वही मौत के दो फरिश्ते थे जिनसे वह सारी रात भागता रहा था। शार्क समझ गया कि इन दोनों ने चादरों में राइफलें छुपा रखी हैं, उनमें से एक ने कहा: शार्क बाउ, खामोशी से हमारे साथ चलो, अगर भागने की कोशिश की तो हम फायर खोल देंगे, हमें इस बात की परवाह नहीं कि कितने लोग गोलियों का निशाना बनेंगे, लेकिन तुम ज़िंदा नहीं बच सकते।
शार्क के मुंह से बे इख्तियार गहरा सांस निकल गया, फिर अचानक वह एक ताकतवर स्प्रिंग की तरह उछला, वह मार्शल आर्ट्स का माहिर था दोनों के चेहरे पर पड़ने वाली ठोकरों ने उन दोनों को कराहने पर मजबूर कर दिया। वे नीचे जा गिरे, शार्क भी गिरा लेकिन फ़ौरन संभलकर एक तरफ दौड़ लगा दी, एक आदमी ने जल्दी से उठकर राइफल संभाली और फायर कर दी, शार्क उस गोली से महफूज़ रहा लेकिन वह गोली एक मजदूर के सीने में उतर गई !
वह चीखता हुआ ढेर हो गया, पूरी मंडी में भगदड़ मच गई, लोग बदहवास होकर इधर-उधर दौड़ने लगे, शार्क भीड़ में रास्ता बनाता हुआ एक तरफ भाग रहा था, अंत में वह मंडी में काफी दूर निकल गया, उसका हुलिया मजदूरों जैसा था, अचानक एक व्यक्ति ने उसे अपने पास आने के लिए आवाज़ दी, वह उसे मजदूर समझ बैठा था। उसने शार्क को केलों वाला टोकरा उठाने का कहा जो काफी भारी था, शार्क ने टोकरा उठा लिया और उस व्यक्ति के साथ दौड़ना शुरू कर दिया, लगभग पचास गज़ के फासले पर एक सुजुकी पिकअप खड़ी थी, शार्क ने केलों वाला टोकरा उस पिकअप में रख दिया!
उस व्यक्ति ने पांच का एक नोट निकालकर उसकी ओर बढ़ाया तो शार्क ने कहा: मंडी में गोलियां चल रही हैं, आप मुझे भी शहर साथ ले जाएं, अब यहां काम करना मुमकिन नहीं है। उस व्यक्ति ने शार्क को अपने साथ बैठा लिया और तेजी से सुजुकी पिकअप को एक झटके से आगे बढ़ा दिया। सुजुकी विभिन्न रास्तों से गुजरती हुई चौबुर्जी पहुंचकर रुक गई, शार्क शुक्रिया अदा करता हुआ नीचे उतर आया!
और पैदल चलता हुआ एक तरफ जाने लगा। वह कुछ दूर बाजार में चलता रहा फिर एक गली में मुड़ गया, और एक बंगला नुमा आवासीय मकान के सामने रुक गया, इस समय सूरज उदित हो चुका था और सूरज की किरणें बहुत सुंदर लग रही थीं।
गेट को बाहर से ताला लगा हुआ नहीं था। उसने गेट की एक शीट में हाथ डालकर अंदर से लगा हुआ कुंडा हटा दिया और गेट खोलकर अंदर दाखिल हो गया और गेट बंद कर दिया, वह यहीं रहता था और मोहल्ले वाले उसे एक शरीफ़ आदमी समझते थे। शार्क ने जैसे ही कमरे में दाखिल होकर बल्ब ऑन किया अचानक एक आदमी दरवाज़े की आड़ से निकलकर सामने आ गया, उसके पास पिस्तौल था।
वह आदमी शैतानी मुस्कराहट के साथ बोला: तुम क्या समझते हो शार्क बाउ, हमें धोखा देकर हमसे बच निकलोगे? माझा गुज्जर जिस आदमी के साथ भी कारोबार करता है उसके बारे में पूरी जानकारी रखता है, तुम्हारा यह ठिकाना कई दिन पहले ही हमारी नज़रों में आया था, और हमें यकीन था तुम भागकर यहीं आओगे। मैं माझा गुज्जर का एक मुलाजिम हूं, तुम पाताल में भी छुप जाओ तब भी हम तुम्हें ढूंढ निकालेंगे।
शार्क एक गहरा सांस लेकर रुक गया, उसके माथे पर पसीना आ गया, मौत उसके सामने खड़ी थी, और वह बेबस हका-बका उस मौत के आने का इंतज़ार कर रहा था। यह एलियास था माझा गुज्जर का जान निसार मुलाजिम। शार्क के मुंह से गहरा सांस निकल गया। वह दो कदम पीछे हटा फिर अचानक बड़ी फुर्ती से नीचे बैठ गया और एलियास के हाथ में पकड़े पिस्तौल पर एक ठोकर मारी।
एलियास का दर्द से कराहते हुए पिस्तौल उसके हाथ से छूटकर गिर गई। शार्क ने तेजी से अपने दुश्मन पर हमला कर दिया। एलियास ने भी जवाबी हमला कर दिया। एलियास का दांव चल गया और उसने शार्क को उठाकर सोफे के दूसरी तरफ धकेल दिया। शार्क के होंठों से खून बहने लगा, शार्क फुर्ती से उठा इससे पहले कि एलियास पिस्तौल उठाकर शार्क की खोपड़ी उड़ा देता, शार्क ने उसे कमीज की कॉलर से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और नीचे गिरा दिया, एलियास की बदकिस्मती कि वह बुरी तरह शार्क के दांव में आ गया।
सांस रुकने से उसका दम घुटने लगा, शार्क पूरी ताकत से उसके साथ लिपट गया। एलियास की आंखें हलकों से उबलने लगीं, वह बुरी तरह पैर पटकने लगा। शार्क ने लगातार दो झटके दिए और कड़क की आवाज के साथ एलियास की गर्दन की हड्डी टूट गई। शार्क ने एलियास की लाश की तरफ देखा और तेजी से अलमारी की तरफ बढ़ा, अपना एक सूट निकाला और वॉशरूम जाकर अपना हुलिया ठीक किया, और कमरे से सभी सबूत मिटा दिए।
दो दिन पहले उसने मकान किराए पर हासिल किया था और अपना जाली नाम और पता बताकर कुछ अतिरिक्त पैसे देकर अस्थायी तौर पर शिफ्ट हो गया था। उसने सभी माल जो प्लास्टिक की थैलियों में था और रुपये एक बैग में भर लिए, करोड़ों का माल माझा गुज्जर का था इसलिए वह शार्क के खून का प्यासा हो गया था। शार्क बेडरूम से बैग लेकर बाहर आ गया और कमरा लॉक कर दिया, और सभी लाइट्स ऑफ कर दीं।
सड़क पर से रिक्शा मिल गया, रेलवे स्टेशन के पास रिक्शा छोड़ दिया और कुछ मिनट बाद दूसरे रिक्शे में बैठकर एक रेस्तरां के सामने उतर गया। काउंटर पर बैठे एक लड़के को इशारा करते हुए वह ऊपर कमरे में चला गया। यह रेस्तरां उसके दोस्त सहील का था, सहील भी उसके पीछे कमरे में दाखिल हुआ। उसके पूछने पर शार्क ने बताया कि माझा गुज्जर के खिलाफ उसका प्लान नाकाम हो चुका है।
मुश्किल से जान बचाकर यहां पहुंचा है और अब आराम करना चाहता है। सहील वापस चला गया और शार्क बिस्तर पर लेट गया। बंद आंखों के पीछे वह अपने माज़ी के दरीचों में खो गया। जो उसके साथ हो चुका था और आज शार्क जिन हालातों से गुजर रहा था। माज़ी एक फिल्म की तरह चलने लगा।